अवधी में रचित वह लोककाव्य जो धर्म मण्डल की संस्थापना, संघर्ष, सहयोग और
विकास की स्मृतियों को जीवंत रखता है।
एक जीवंत सांस्कृतिक दस्तावेज
विरह गीत में धर्म मण्डल की शुरुआत, बच्चों की रामलीला, गाँव का सहयोग और 1932 से आगे बढ़ती परंपरा का भावपूर्ण वर्णन है।
मूल अवधी रचना
यह गीत केवल इतिहास नहीं सुनाता, बल्कि उस समय के उत्साह, लोगों की भागीदारी और रामलीला के प्रति श्रद्धा को भी जीवंत कर देता है।
विरहा
लेखक–प्रकाशनाथ
महिमा राम की न जानी सुनो दशमी की कहानी।
कैसे लीला भया हो सरनाम।।
सन (१९३२) में, कुछ लड़िके किहेन खेलाई हो।
रंग बिरंगा कागज लाइके, रावण किहेन बनाई हो।।
बुधवार बाजार का दिन था, राही करें पूछाई हो।
कहाँ क रावण तू सब बनवत, सुन्दर छाप लगाई हो।। कैसे।।
बक्सा का एक टूटन मिलि गय, पीट-पीट गोहराई हो।
गाँव के दसमी कल हमरे हो, आवा करें दिखाई हो।।
केहु तो समझे झूठ-मूठ हो, केहु तो फुर मन लाई हो।
गाँव के ऐंयड़े गोंयड़े वाले, सुन-सुन करें हँसाई हो।। कैसे।।
होत भोर बिएफे के लड़िके, रावण किहेन गड़ाई हो।
लाल हरी झण्डी भी गाड़ेन, बाग में किहेन सफाई हो।।
चमकौआ कुछ मुकुट बना के, सिर पर लिहेन लगाई हो।
सोलह गण्डे के खर्चे में, दसमी दिहेन लगाई हो।। कैसे।।
छुट्ट पुट्ट दुई चार दुकानें, बाग के अन्दर आई हो।
पटहारा बरई भी आया, आया एक हलवाई हो।।
नून, तमाखू, सुरती वाला, पहुँचा एक मुराई हो।
लड़िके पैसा मांगे लागेन, बाप पे आफत आई हो।। कैसे।।
टेट में पैसा लै के आये, बाप चचा और भाई हो।
देख के लड़िकन के दसमी, वह मन में अति हर्षाए हो।।
किये संकल्प राम भरोसे, ले अब हाथ बँटाई हो।
लौटे घरे सब मीठिंग कइके, चन्दा लिहेन लगाई हो।। कैसे।।
सन उन्नीस सौ तैंतीस में फिर अद्भुत रूप देखाई हो।
सौ सैकड़े में क्या रक्खा, हजार मन ना भाई हो।।
वकील छोटे बने सेकेरेटरी, उचित सलाह बताई हो।
डाइरेक्टर बैनी प्रसाद बन हाव भाव सिखलाई हो।। कैसे।।
गोविन्द गोदाम के मालिक है, जो सब चीज रखाई हो।
वकील गोपी बने खजांची, जोड़े पाई-पाई हो।।
स्टेज बनाये राम पियारे, करामात दिखलाई हो।
वकील लालता जौनपुरी, हर साल इनाम बँटाई हो।।
सैनिटरी इंस्पेक्टर कमला, करें गैस सप्लाई हो।। कैसे।।
हरिश्चन्द्र वर्मा ने भी, काफी उन्नति दिखलाई हो।
एक संघ कायम करके, आपस में मेल कराई हो।।
कहें प्रकाश राजा बब्बू से कैसी धूम मचाई हो।
यह सब रही कृपा भगवान की, जो मन में बस जाई हो।। कैसे।।
विरहा गीत सुनें
धर्म मण्डल की संस्थापना और लोक-स्मृतियों को अवधी स्वर में संजोती यह प्रस्तुति यहाँ देखें।