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आस्था से आरंभ हुई और पीढ़ियों से प्रेम, सेवा तथा अनुशासन के साथ निभाई जा रही सांस्कृतिक परंपरा।

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1932 से आज तक — आस्था, भक्ति और संस्कृति की अविरल यात्रा

श्री सीताराम धर्म मण्डल, सराय हरखू (जौनपुर) हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। सन् 1932 से प्रारंभ हुई इसकी परंपरा आज नौ दशकों से अधिक समय बाद भी उसी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।

धर्म मण्डल की स्थापना का मूल उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, धर्म, कर्तव्य एवं लोकमंगल की भावना को रामलीला और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना रहा है। समय के साथ यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे ग्राम और समाज को जोड़ने वाली एक जीवंत सांस्कृतिक संस्था के रूप में विकसित हुआ।

आज श्री सीताराम धर्म मण्डल नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपरा से जोड़ते हुए आस्था, संस्कृति, सामाजिक एकता और सामुदायिक सहभागिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

स्थापना एवं परंपरा

स्थापना
सन् 1932
प्रमुख आधार
रामलीला एवं सांस्कृतिक परंपरा
उद्देश्य
श्रीराम के आदर्शों एवं भारतीय संस्कृति का प्रसार
विरासत
पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामुदायिक सहभागिता
परंपरा के तीन स्तंभ

श्रद्धा • आस्था • भक्ति

श्रद्धा

श्रद्धा

पूर्वजों के संकल्प और श्रीराम के आदर्शों के प्रति गहरे सम्मान से पोषित परंपरा।

आस्था

आस्था

सन् 1932 से चली आ रही वह विश्वास-धारा जो पूरे ग्राम को एक सूत्र में जोड़ती है।

भक्ति

भक्ति

रामलीला, सेवा और सांस्कृतिक आयोजनों में दिखाई देने वाला सामूहिक समर्पण।

धर्म • आस्था • भक्ति • इतिहास • संस्कृति • साहित्य • विरासत

यही भाव धर्म मण्डल की पहचान है और यही संदेश नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा सतत संकल्प है।